हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , यमन के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबही ने तइज़ प्रांत में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सऊदी आक्रामकता और नाकेबंदी के कारण देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को हुए नुकसान का विवरण दिया।
उन्होंने बताया कि सऊदी आक्रामकता के दौरान यमन के 139 अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि लगभग 190 एम्बुलेंस भी नष्ट हो चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यमन के लगभग 55 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सा संस्थान हमलों का निशाना बने हैं या काम करने में असमर्थ हो गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने नाकेबंदी और प्रतिबंधों के कारण दवाओं की भारी कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 1,600 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 12 प्रकार की दवाएं भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कैंसर से पीड़ित 1 लाख 25 हजार से अधिक मरीज आवश्यक दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं और उनकी जान खतरे में है। इसी तरह थैलेसीमिया तथा खून की अन्य बीमारियों से पीड़ित 40 हजार से अधिक मरीजों और किडनी फेल होने की समस्या से जूझ रहे 8 हजार से अधिक लोगों को भी दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और इलाज के आवश्यक सामान की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
अनीस अल-असबही ने आगे कहा कि सना हवाई अड्डा बंद होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए विदेश नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा, आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बच्चों में कुपोषण की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के 36 लाख से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं, जिनमें 18 लाख से अधिक बच्चे अत्यंत गंभीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम उम्र के 45 प्रतिशत से अधिक बच्चों की लंबाई कुपोषण के कारण उम्र के अनुपात में नहीं बढ़ पा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2017 से 2024 के बीच 60 लाख से अधिक गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी मध्यम और गंभीर कुपोषण से प्रभावित हुईं।
अनीस अल-असबही के अनुसार, यमन में मानवीय संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के 2 करोड़ 40 लाख से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
हाल के हमलों में हुए जान-माल के नुकसान का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि 3 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 120 लोग शहीद हुए और 307 लोग घायल हुए। इस प्रकार, हालिया हमलों में शहीदों और घायलों की कुल संख्या 427 हो गई, जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।उन्होंने तइज़, सअदा और अल-जौफ प्रांतों को उन क्षेत्रों में शामिल बताया, जहां हमलों के कारण सबसे अधिक जनहानि हुई है।
यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने आम नागरिकों और चिकित्सा केंद्रों पर हमलों के मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं से मांग की कि हमलों के जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने और यमन की नाकेबंदी समाप्त कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि यमन का स्वास्थ्य मंत्रालय कई बार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सना हवाई अड्डे को दोबारा खोलने और मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपील कर चुका है। हालांकि, उनके अनुसार, इन मांगों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
अनीस अल-असबही ने दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि हमलों में तेजी यमनी जनता के हौसले और उसकी दृढ़ता को कमजोर नहीं कर सकेगी।
आपकी टिप्पणी